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Wednesday, 18 December 2013

बयान बहादुरी के बदले काम और भी हैं...

प्रणव प्रियदर्शी
रांची : झारखंड सरकार में कांग्रेस के मंत्री बयान बहादुर हैं. ये बात पूरी यकीन के साथ कहा जा सकता है. फिर भी किसकी मजाल कि इन्हें कोई किसी और काम की नसीहत दे. जब कांग्रेस अलाकमान की मर्जी को भी यहां शिकस्त दे दिया जाता है तो किसी और के क्या कहने! प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और झारखंड प्रभारी बीके हरिप्रसाद की लाख मिन्नतें, आरजू और आदेश के बावजूद स्थिति जस की तस है. रूठने-मनाने का मुहूर्त बार-बार निकल आता है और जनाकांक्षाओं का सूरज छिप जाता है. कभी गधे को गुलकंद वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है तो कभी थोथा चना, बाजे घना का राग उभर अता है.
अभी झारखंड की सियासत में विभागीय अफसरों को आड़े हाथों लेने का नया प्रचलन शुरू हुआ है। भला इसमें विवादों से चोली दामन का साथ रखनेवाली शिक्षा मंत्री गीताश्री भी पीछे क्यों रहे! मियां की जूती, मियां के सिर। उन्होंने वरिष्ठ आइएएस आॅफिसर व योजना विकास सचिव डीके तिवारी को चपेटे में ले लिया. वह भी अनुसंधान और समीक्षा की पहलुओं में गोता लगाये बिना. उन्होंने सबसे पहले तो उनपर भाजपा के करीबी होने का आरोप लगाया. वहीं, दूसरी तरफ पारा शिक्षकों की फाइल पर कुंडली मार कर बैठने की बात कही. पहला आरोप उनकी व्यक्तिगत संकीर्णता का परिचायक है तो दूसरा आरोप उनकी पीडि़त मानसिकता का. मीडिया रिपोर्टों से खुलासा भी हो चुका है कि पारा शिक्षकों के मानदेय वृद्धि से संबंधित फाइल 29 अक्टूबर से ही मुख्यमंत्री सचिवालय में पड़ी है. उनके इस कारनामे से फिर कांग्रेस के माथे पर लकीर उभर आयी है. पार्टी कहती है कि कांग्रेस का एजेंडा लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनायें. लेकिन मंत्रियों का सुर्खियों में बने रहने का एजेंडा सब मट्यामेट कर देता है. कांग्रेस के मंत्रियों के फसाने और भी हैं. ग्रामीण विकास मंत्री ददई दुबे विभागीय सचिव के बदले जाने बिफर पड़ते हैं. मन्नान मल्लिक की कौन कहे वे तो कैबिनेट बंटवारे पर ही तन जाते हैं और मुख्यमंत्री को ही अलोचना के घेरे में ले लेते हैं. पश्ुपालन मंत्री योगेंद्र साव ताल ठोंक कर आईजी आरके मल्लिक और रांची एसपी साकेत सिंह के तबादले का श्रेय लेते हैं. 58 हजार का पेट्रोल जबरन भरवा कर होठ पसाड़ कर बेगुनाही का बयान दे देते हैं. डीएओ (जिला कृषि पदाधिकारी) के पास पेट्रोल पंप का नोटिस आता है और वह माथा पकड़ लेते हैं. पार्टी पीछे-पीछे अती है. जांच-पड़ताल की बात करती है. कार्रवाई का भरोसा देती है. दिन बीतते हैं और सभी सिरहाने सिमट जाते हैं.
इन्हें विधानसभा अध्यक्ष से सीखनी चाहिए कि उन्होंने प्रोटोकॉल के मामले पर अपनी सुरक्षा लौटायी. फिर आलाअधिकारियों के साथ बैठक की. उसके बाद बयान दिया. अपनी नाराजगी को तर्कसंगत पहलुओं से हल करने के बाद कहा कि सिर्फ सीएम की ही सुनते हैं अफसर. उन्होंने अधिकारियों की बातें भी स्वीकारी कि अध्यक्ष का प्रोटोकॉल यहां तय नहीं है. उन्होंने कहा कि जब प्रोटोकॉल ही तय नहीं है तो इस पर क्या कहना! उन्होंने जिलों में प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला उठाया था. सुरक्षा को लेकर सवाल नहीं उठाया था. अब विस अध्यक्ष ने बिहार विधानसभा को पत्र लिख कर सुरक्षा के संदर्भ में जानकारी मांगी है.
कांग्रेस के मंत्रियों से लेकर पार्टी तक को यह समझना होगा कि अब फाकामस्ती से काम नहीं चलेगा. जनता का मिजाज बदल चुका है. उसे नित नूतन बयानों की फितरत से नहीं फुसलाया जा सकता. अपना ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ने से बात नहीं बनेगी. नहीं तो झारखंड में भी कहीं वही हश्र न हो जाये जो मध्यप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में हुआ. आगे लोकसभा की रणभेड़ी बजनेवाली है. झारखंड में अब आम अदमी पार्टी भी अपनी भुजाएं उठा रही है. नये-नये कार्यकर्ता जुड़ कर इसकी सबलता सुदृढ़ कर रहे हैं. इसलिए झारखंड की सियासत को आधा तीतर आधा बटेर जैसी स्थिति से उबड़ कर अपनी करनी पार उतरनी जैसे हर्फ गढ़ने होंगे.

Saturday, 19 October 2013

आतंकी पनाह से दहल रहा मिथिलांचल


प्रणव प्रियदर्शी 
विरल संस्कृति, सहजीवन पद्धति और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करनेवाला मिथिलांचल अब परेशान हो उठा है। आखिर हो भी क्यों नहीं; सहज जीवन का स्वर साधक मिथिला को आतंकियों की नजर डसती जा रही है। अमन-चैन की यह धरती आतंकी फसल को लहलहाते देख सतर्कता और सकुचाहट के साथ संशय में पड़ गयी है। मिथिला की विशेषता ही इसकी कमजोरी बन गयी है। आज यह भूमि आंतकियों का 'सेफ जोन' माना जा रहा है। बोधगया बम ब्लास्ट के बाद से बिहार भी पहली बार आतंकी हमला का केंद्र बिंदु बन गया। तिस पर से एक के बाद एक इंडियम मुजाहिदीन (आइएम), लश्कर-ए तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन के आतंकवादियों की लगातार गिरप्तारी से यह अपने अस्तित्व का मुंह जोहने लगा है। ये धरती अब खुफिया एजेंसी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी की नजरों में गर गयी है।
      पहली बार आतंकवादी गतिविधियों को लेकर मिथिलांचल के दरभंगा जिले का नाम वर्ष 2007 में पहली बार सामने आया था।  इस वर्ष अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम के खासमखास फजलुर रहमान की गिरफ्तारी के लिए जाले थाना के देवरा बंधौली गांव में छापामारी की गयी। हालांकि वह पुलिस की पकड़ से बच निकला था। 17 अप्रैल 2010 बेंगलूर के चिन्ना स्वामी स्टेडियम में हुए धमाके को लेकर बाढ़ समैला गांव के मोहम्मद कफिल, मोहम्मद कतिल और मोहम्मद गौहर अजीज को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आतंकवादियों से मिली सूचना पर ही इसी गांव के दो आतंकी मोहम्मद सैफ और फसी अहमद महमूद को सउदी अरब से पिछले वर्ष गिरफ्तार किया गया था। इस वर्ष 21 जनवरी 2013 को भटकल के बेहद करीबी मोहम्मद दानिश को दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना के चकजोहरा गांव से जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। यहां इसके रहने की सारी व्यवस्था भटकल ने ही किया था।
     इसतरह छोटे-बड़े स्तर पर यह क्रम जारी है। इसी क्रम में पिछला महीना 29 अगस्त को नेपाल से सटा बिहार के रक्सौल शहर से इंडियन मुजाहिदीन सरगना और सह संस्थापक यासीन भटकल और उसका करीबी असदुल्ला अख्तर उर्फ हड्डी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी बिहार पुलिस और एमआइए के सामूहिक सहयोग से हुई। शेष आतंकवादियों की गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी लगातार अभियान चला रहा है। बिहार पुलिस का कहना है कि अपने मिशन को अंजाम देने की योजना पे बात करने के लिए यहां इकट्ठा हुए थे। भटकल देश के 12 सबसे अधिक वांछित आंतकवादी की सूची में शामिल था। इसे पकड़ने में खुफिया एजेंसी को छह महीना का समय लग गया।
     हैदराबाद में इस वर्ष फरवरी में हुए बम धमाके में उसका हाथ होने का पता लगने के बाद पूरा तंत्र उसकी गिरफ्तारी में जुटा था। और, वह अपनी पहचान छिपा-छिपा के बिहार के गांवों को अपना आसरा बना रहा था। कहा जा रहा है कि भटकल की गिरफ्तारी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम एवं हाफिज सईद के करीबी आ लश्कर-ए-तैयबा का बम एक्सपर्ट आतंकवादी टुंडा के निशानदेही पर हुई। टुंडा की गिरफ्तारी पिछला महीना अगस्त में हुई। 70 वर्षीय अब्दुल करीम टुंडा को भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा (महेंद्रनगर, उत्तराखंड) से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। 26 नवंबर (26/11) 2008 के चर्चित मुंबई आतंकी हमला के बाद भारत ने पाकिस्तान को जो 20 आतंकवादियों की सूची दी थी, उसमें टुंडा का नाम सबसे ऊपर था। टुंडा की गिरफ्तारी के एक ही सप्ताह बाद 24 अगस्त को बिहार के कटिहार जिला के कदवा थाना क्षेत्र के सिंगलपुर गांव से पुलिस ने टुंडा के सहयोगी मोहम्मद बशीर को गिरफ्तार किया।
     कनार्टक के भटकल गांव का रहनेवाला यासीन का ससुराल समस्तीपुर है। उसका लाभ उसे हरदम अपने काम को आगे बढ़ाने में मिलता रहा। गिरफ्तारी के बाद एनआइए उसे पूछताछ के लिए दरंभगा भी ले गयी थी। कड़ी सुरक्षा के बीच एनआइए की टीम भटकल को लेकर लेहरियासराय थानांतर्गत करमगंज मुहल्ला के पुस्तकालय ले गयी, जहां वह आया-जाया करता था। जमालचक गांव मंे जहां भटकल रहता था और अन्य जगहों से भी जानकारियां इकट्ठी की गयी। वर्ष 2010-12 के बीच भटकल डॉ. इमरान नाम से यूनानी चिकित्सक के रूप में यहां रहता था। इसके पीछे नवयुवकों को बहला-फुसला कर अपने संगठन का सदस्य बनाता था। इसी साल 21 जनवरी को भटकल का बेहद सहयोगी मोहम्मद दानिश को भी  दरभंगा के लेहरियासराय थाना के चकजोहरा से जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया था।
      इसतरह के आतंकी गतिविधियों के पद्चाप का मूल कारण है भारत-नेपाल की खुली सीमा। उत्तराखंड से बिहार तक नेपाल के साथ खली सीमा है। बिना अवरोध इस सीमा पर आवागमन जारी है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर कड़ा पहड़ा है। इसलिए पाकिस्तानी आतंकवादी अपना मंसूबा पूरा करने के लिए बेधड़क इस सीमा का इसेतमाल कर रहे हैं। सैकड़ों कीलोमीटर इस सीमा पर प्रांतीय पुलिस और एसएसबी के जवान तैनात है, जिन पर सख्ती नहीं करने का दबाव है। धर्मावलंबियों के प्रति भारत में सदियों से उदारता का भाव है, जिसका लाभ आतंकवादी उठाते हैं।
      कहा जा रहा है कि बिहार के बॉर्डर इलाका मे पढे़-लिखे लोग और आम लोग जो कमाने के लिए बिहार से बाहर जा रहे हैं, उनकी जमीन एक समुदाय के लोग भारी संख्या में खरीद रहे हैं। विदेश से आये रुपये का निवेश जमीन-खेत-खलिहान-बगीचा खरीदने में किया जा रहा है। इलाका के ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार और दूसरी जाति के लोग भी नौकरी के सिलसिले में गांव छोड़ रहे हैं। इसतरह के गांव छोड़नेवाले लोगों की जमीन पर असमाजिक गतिविधि चलानेवाले लोगों की नजर है। इस पर गौर करने की जरूरत है।
      देश भर में कहीं से अपराध कर बिहार आयें। बिहार से नेपाल और बंग्लादेश होकर बाहर निकल जायें। इसी कारण इंडियन मुजाहिदीन और दूसरे आतंकवादी संगठन मिथिला में अपनी पकड़ मजबूत बनाने में लगे हैं। आतंकी अभी पूरा उत्तर बिहार-मिथिला के इलाके पर अपना तंत्र मजबूत करने में लगा है। इसमें चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्णिया, अररिया, सहरसा आौर दूसरे बॉर्डर इलाका के लोगों को संगठन से जोड़ा जा रहा है। ये इलाके पहले से ही स्मगलिंग के लिए बदनाम है। आम समान में तस्करी में तो कमी आयी है, लेकिन अब हवाला और दूसरे तरह की तस्करी बढ़ रही है। आतंकी नये-नये इलाकों की तलाश कर रहे हैं। उसमें मिथिला का इलाका सबसे अच्छा माना जा रहा है, आतंकी गतिविधि को चलाने के लिए।
         नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से बड़ी संख्या में आतंकवादी भारत आ रहे हैं। आतंकवादी इसी रास्ते भारत आकर आत्मसमर्पण भी कर रहे हैं। वर्ष 2010 से अब तक 300 से अधिक आतंकवादी भारत में आकर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें कई भारतीय युवा पाकिस्तान जाकर आतंकवाद का प्रशिक्षण हासिल करके जब नियंत्रण रेखा से भारत लौटने में कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने वहीं शादी विवाह कर लिये। अब बाल-बच्चों को साथ लेकर भारत लौट रहे हैं। पूवार्ेत्तर के कई उग्रवादी भी नेपाल के रास्ते का इस्तेमाल करते हुए पकडे़ गये हैं।
इन सभ गतिविधियों पर अंकुश लगाने के मद्देनजर 2005 से भारत-नेपाल के बीच सीमा समझौता करने की बात शुरू हुई थी। लेकिन नेपाल अपनी राजनीतिक अस्थिरता का बहाना बना कर समझौता की बात टाल दिया, जो अभी भी टला हुआ है। एसएसबी कितनी बार कह चुका है कि भारत की सीमा पर कुकुरमुत्ता की तरह उगा मदरसा खतरनाक साबित हो रहा है। मिथिला के बॉर्डर वाले इलाके में बताया जा रहा है कि पिछले 15-20 साल में मस्जिद-मदरसा की संख्या 10 गुना से अधिक बढ़ गयी है। आइएम (इंडियन मुजाहिदीन) आओर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ (इंटर सर्विस इंटेलिजेंस) इसके माध्यम से युवकों को जेहाद के लिए भड़का रहे हैं।
          कहा जा रहा है कि नेपाल और अरब देश के जरिये आइएसआइ बिहार के बार्डर इलाकों में काफी पैसा भेज रहा है। इन इलाकों में बन रही बड़ी-बड़ी मस्जिद-मदरसा के लिए अरब से पैसे आ रहे हैं। लेकिन वोट का गणित भारत सरकार को इस दिशा में पैर उठाने के लिए रोक रहा है। आतंकवादी वोट के आधारवाले इस भाव को समझते हैं, इस कारण बेरोकटोक मदरसा खोल भारत को अस्थिर करने का मंसूबा पूरा कर रहे हैं। चिंता की बात यह भी है कि नीतीश सरकार इन सब समस्याओं को केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन का दायित्व समझ कर मौन साधे हुई है। आवश्यकता है मिथिला के आमजन के साथ पूरा बिहार और भारत को जागरूक होने की। दहशतगर्दियों के खिलाफ प्रतिबद्ध होकर शंखनाद करने की। 

Friday, 18 October 2013

आंतकीक ठौर बनैत जा रहल अछि मिथिला

प्रणव प्रियदर्शी
अपन सांस्कृतिक छटा, सांप्रदायिक सौहार्द आ सहज जीवनक स्वर साधक मिथिला कें आब आतंकक गेहुमन डसि रहल अछि। अमन-चैनक ई धरती आतंकी फसल कें लहलहाइत देखि संशय मे परि गेल अछि। मिथिलाक बैशिष्टे एकर कमजोरी बनि रहल अछि। आइ मिथिलाक भूमि आतंकी कें 'सेफ जोन' मानल जा रहल अछि। ओना बोधगया बम ब्लास्ट कें बादे सं बिहारो पहिल बेर आतंकी हमला कें केंद्र बनि गेल। ताहि मे मिथिला सं एक केर बाद एक इंडियन मुजाहिदीन (आइएम), लश्कर-ए-तैयबा सनहक आतंकवादी संगठनक आतंकवादी कें लगातार गिरफ्तारी सं ई अपन अस्तित्वक मुह जोहि रहल अछि। ई धरती आब खुफिया एजंसी आ राष्ट्रीय जांच एजेंसी कें नजरि मे गरि गेल अछि।
   पहिल बेर 2007 मे मिथिलांचलक दरभंगा जिला केर नाम आतंकी गतिविधिक कारण समक्ष आयल छल। एहि वर्ष अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीमक खासमखास फजलुर रहमानक गिरफ्तारी कें लेल दरभंगा कें जाले थानाक देवरा बंधौली गांव में छापामारी कएल गेल छल। मुदा ओ पुलिस कें हाथ मे नहि आयल छल। 17 अप्रैल 2010 कें बेंगलुरू कें चिन्ना स्वामी स्टेडियम मे भेल बम धमाकाक लेल दरभंगा कें बाढ़ समैला गाम कें मोहम्मद कफिल, मोहम्मद कतिल आर मोहम्मद गौहर अजीज गिरफ्तार भए चुकल अछि। गिरफ्तार आतंकी सं भेटल सूचना कें बल पर एहि गांव के दु गोट आर आतंकवादी मोहम्मद सैफ आर फसी अहमद महमूदक सउदी अरब से पिछला वर्ष गिरफ्तारी भेल छल। इएह साल 21 जनवरी 2013 कें भटकलक खासमखास मोहम्मद दानिश कें दरभंगे जिला कें लहेरियासराय थाना के चकजोहरा गाम सं जांच एजेंसी गिरफ्तार कयने छल। अहुठाम एकरा रहैक लेल भटकले बंदोबस्त केने छल।
  एहि तरहें छोट-पैघ स्तर पर ई क्रम जारि अछि। एहि क्रम मे पिछला महीना 29 अगस्त कें नेपाल सं लागल बिहारक रक्सौल शहर सं इंडियन मुजाहिदीन सरगना वा सह संस्थापक यासीन भटकल आ ओकर करीबी असदुल्ला अख्तर उर्फ हड्डीक गिरफ्तारी भेल। ई बिहार पुलिस आ एनआइए के सामूहिक सहयोग सं भेल। शेष आतंकवादीक गिरफ्तारी लेल जांच एजेंसी लगातार अभियान चला रहल अछि। बिहार पुलिस कें कहने छै जे दुनू आतंकवादी अपन मिशन कें अंजाम देबाक योजना पे बातचीतक लेल एतय आयल छल। भटकल देश कें 12 सभ सं अधिक वांछित आतंकवादी कें सूची मे शामिल अछि। ओकरा पकड़ए मे खुफिया एजेंसी कें छह महीना कें समय लागल।
    हैदराबाद मे एहि साल फरवरी मे भेल बम धमाका मे ओकर हाथ हेबोक बाद सं पूरा तंत्र ओकर गिरफ्तारी मे जुटि गेल छल। आओर, ओ अपन पहिचान छुपा-छुपा कें बिहारक गाम सभक अपन आसरा बनबैत छल। कहल जा रहल अछि जे भटकलक गिरफ्तारी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम आ हाफिज सईद कें करीबी आओर लश्कर-ए-तैयबा कें बम एक्सपर्ट आतंकवादी टुंडा कें निशानदेही पर भेल। टुंडा कें गिरफ्तारी अगस्त मे भेल। 70 वर्षीय अब्दुल करीम टुंडा कें भारत-नेपाल सीमा पर वनबसा (महेंद्रनगर, उत्तराखंड) सं दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कएलक। 26 नवंबर के चर्चित मुंबई आतंकी हमलाक बाद भारत पाकिस्तानक जे 20 आतंकवादी कें नामक सूची देलक ओहि मे टुंडाक नाम सभ सं ऊपर छल। टुंडाक गिरफ्तारीक एकहि सप्ताह बाद 24 अगस्त कें बिहारक कटिहार जिलाक कदवा थाना क्षेत्रक सिंगलपुर गांव सं पुलिस टुंडा कें सहयोगी मोहम्मद बशीर कें गिरफ्तार कएलक।
  कर्नाटक कें भटकल गामक रहनिहार यासीन कें सासुर समस्तीपुर अछि। ओकर लाभ ओकरा सदिखन अपन काज कें आगा बढ़यबा मे करए छल। गिरफ्तारीक बाद एनआइए ओकरा पूछताछक लेल दरभंगो लए गेल छल। कड़गर सुरक्षा मे एनआइए कें टीम भटकल कें लए कें लेहरियासराय थानांतर्गत करमगंज मुहल्लाक पुस्ताकलय गेल, जतए ओ पहिने जाइत-आबैत छल। जमालचक गाम मे भटकलक घर संगे आन-आन ठाम सं सहो जानकारी जुटायल गेल। साल 2010-2012 कें बीच भटकल डॉ. इमरान के नाम सं एक गोट युनानी चिकित्सिक के रूप मे दरभंगा मे रहैत छल। एहि क्रम मे नवतुरिया सभ के बहका कें अपन संगठनक सदस्य बनबैत छल। एहि साल 21 जनवरी कें भटकलक करीबी मोहम्मद दानिश के सेहो दरभंगाक लेहरियासराय थाना के चकजोहरा से जांच एजेंसी गिरफ्तार केने छल।
  ई सभ आतंकवादी गतिविधिक आहटक मूल कारण अछि भारत-नेपालक खुलल सीमा। उत्तराखंड सं बिहार तक नेपालक संग भारतक खुलल सीमा अछि आ दुनू देशक मध्य एहि सीमा सं बिना अवरोध आवागमन भए रहल अछि। भारत-पाकिस्तान सीमा पें करगर पहरा अछि। एहि कारण पाकिस्तानी आतंकवादी अपन मंसूबा कें पूरा करय लेल बेधड़क एहि सीमा के इस्तेमाल करि रहल अछि। सैकड़ो किलोमीटर नमहर एहि सीमा पर प्रांतीय पुलिस आ सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान तैनात अछि, जकरा पर सख्ती नहि करैक दबाव अछि। धर्मावलंबी कें प्रति भारत मे सदि काल सं उदारता कें भाव अछि, जकर लाभ आतंकवादी कें भेटैत अछि।
सुनबा मे आयल अछि जे बिहारक बॉर्डर इलाका के पढ़ल-लिखल लोक सभ आओर आम लोक जे कमाए-खाए लेल बिहार सं बाहर जा रहल छथि। हुनकर जमीन खास समुदाय के लोक भारी संख्या मे खरीद रहल अछि। विदेश सं आएल पाएक निवेश जमीन-खेत-खलिहान-गाछी मे भ' रहल अछि। एहि इलाका के ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार आ दोसर जातिक लोको सभ नौकरी के सिलसिला मे गाम छोडि़ रहल छथि। एहन गाम छोड़य वाला लोक सभ के जमीन पर असामाजिक गतिविधि चलाबय वाला लोक के नजर अछि। ओ जमीनजथा खरीद सेहो रहल अछि। एहि पर ध्यान देब आवश्यक अछि।
    देश भरि मे कतहुं आतंकी वारदात कए आतंकी बिहार आबि जाइत अछि। किएक त' बिहार सं नेपाल आओर बांग्लादेश भ' बाहर निकलय लेल नीक रहैत छै। एहि लेल इंडियन मुजाहिदीन आओर दोसर आतंकी संगठन मिथिला मे अपन पकड़ मजबूत बना रहल अछि। आतंकी सभ एखन पूरा उत्तर बिहार-मिथिलाक इलाका पर अपन तंत्र मजबूत करय पर लागल अछि। एहि मे चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्णिया, अररिया, सहरसा आओर दोसर बॉर्डर इलाका मे संगठन सं लोक सभ कें जोडि़ रहल अछि। ई इलाका ओहिना पहिने सं स्मगलिंगक लेल बदनाम रहल अछि। आम सामानक तस्करी मे ओना तह्ण कमी आएल अछि। मुदा आब हवाला आओर दोसर तरहक तस्करी बढि़ रहल अछि। आतंकी सभ नव-नव इलाका कें तलाश करि रहल अछि। ओहि हिसाब सं मिथिलाक ई इलाका सभ सं नीक मानल जा रहल अछि आतंकी गतिविधि के चलाबय लेल।
   नेपालक रस्ते पाकिस्तान सं ढेरे आतंकवादी भारत आबि रहल अछि। आतंकवाही एहि रस्ते भारत आबि के आत्मसमर्पण कए रहल अछि। साल 2010 सं अखन तक 300 सं बेसी आतंकवादी भारत आबि कें आत्मसर्पण कए चुकल अछि। एहि मे कतेक भारतक नवतुरिया पाकिस्तान जा कें आतंकवादक प्रशिक्षण लेला कें बाद जखन नियंत्रण रेखा सं भारत लौटबा मे कामयाब नहि भेल त' ओहि ठाम बियाह करि लेलेक। आब बाल-बच्चा सने भारत लौटि रहल अछि। पूर्वोत्तर के कतेक उग्रवादी सभ नेपालक रस्ताक उपयोग करैत पकड़ल गेल अछि।
   एहि सभ गतिविधि पर अंकुश लगाबय लेल 2005 सं भारत-नेपालक मध्य सीमा समझौता करैक बात शुरू भेल छल। मुदा नेपाल अपन राजनीतिक अस्थिरता कें बहाना बनाए समझौताक बात टालि देलक, जे एखनो लटकल अछि। एसएसबी कतेक बेर कहि चुकल अछि भारतक लेल नेपाल सीमा पर कुकुरमुत्ता जेना उगल मदरसा खतरनाक साबित भए रहल अछि। मिथिलाक बॉर्डर इलाका मे बताएल जा रहल अछि जे पिछला 15-20 साल मे मस्जिद-मदरसा के संख्या 10 गुना सं बेसि बढि़ गेल अछि। आइएम (इंडियन मुजाहिदीन) आओर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ (इंटर सर्विस इंटेलिजेंस) एकर मार्फत युवक सभ के जेहाद लेल भड़का रहल अछि।
   कहल त' इहो जे रहल अछि जे नेपाल आओर अरब देशक मार्फत आइएसआइ बिहार कें बार्डर इलाका मे काफी पैसा भेज रहल अछि। एहि इलाका मे बनि रहल बड़का-बड़का मस्जिद-मदरसा कें लेल अरब से पाई आबि रहल अछि। मुदा वोटक गणित भारत सरकार कें एहि दिशा मे पएर  उठाब' लेल रोकि रहल अछि। आतंकवादी वोटक आधारवला एहि भाव कें बुझैत अछि। ताहि कारण बेरोकटोक मदरसा खोलि भारत कें अस्थिर करैक मंसूबा पूरा कए रहल अछि। चिंताक गप इहो अछि जे नीतीश सरकार एहि सब अजगुतक संबंध में केंद्र सरकार आ पुलिस प्रशासनक दायित्व बुझैत मौन साधने अछि। आवश्यकता अछि जे मिथिलाक आमजन संगे पूरा बिहार आ भारत कें जागरूक हेबाक। दहशतगर्दी कें खिलाफ प्रतिबद्ध भए शंखनाद करै कें।